ऐ ज़िंदगी, चल कहीं रू-ब-रू बैठें वहीं कुछ यादों से बातें करें अनकही ऐ ज़िंदगी, चल कहीं रू-ब-रू बैठें वहीं कुछ यादों से बातें करें अनकही, अनकही आज ना जाने क्यूँ हमको वो याद आ गया आज ना जाने दिल पे वो क्यूँ छा गया आज ना जाने हमको वो याद आ गया ♪ दिल में हलचल सी है, गीली शबनम सी है टूटा रिश्ता वो याद आ गया पहरों चलते थे हम, बातें करते थे हम दिन तब छोटे ये लगते थे क्यूँ? फिर ना जाने क्या हुआ, खो गए तुम कहाँ? अब काटे ना कटते हैं दिन ऐ ज़िंदगी, चल कहीं रू-ब-रू बैठें वहीं कुछ यादों से बातें करें अनकही ♪ मीठी यादों के दिन, झूठे वादों के दिन दिन वो सारे थे कितने हसीं ख़ुशियाँ छोटी ही सही, कितनी मासूम थी अब सोचूँ, मुझसे रूठ गए मीठी लगती है अब बातें तेरी हो जब पर संग मेरे तू नहीं ओ, ऐ ज़िंदगी, चल कहीं रू-ब-रू बैठें वहीं कुछ यादों से बातें करें अनकही आज ना जाने क्यूँ हमको वो याद आ गया आज ना जाने दिल पे वो क्यूँ छा गया आज ना जाने हमको वो याद आ गया